وَسَبِّحُوهُ بُكۡرَةٗ وَأَصِيلًا ٤٢
तथा सुबह व शाम उसकी पवित्रता बयान करो।
तफ़सीर
तथा दिन की शुरुआत और उसके अंत में 'तस्बीह' (सुब्हानल्लाह) और 'तहलील' (ला इलाहा इल्लल्लाह) के द्वारा उसकी पवित्रता बयान करते रहो, क्योंकि ये दोनों प्रतिष्ठा वाले समय हैं।