وَقَرۡنَ فِي بُيُوتِكُنَّ وَلَا تَبَرَّجۡنَ تَبَرُّجَ ٱلۡجَٰهِلِيَّةِ ٱلۡأُولَىٰۖ وَأَقِمۡنَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتِينَ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِعۡنَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓۚ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيُذۡهِبَ عَنكُمُ ٱلرِّجۡسَ أَهۡلَ ٱلۡبَيۡتِ وَيُطَهِّرَكُمۡ تَطۡهِيرٗا ٣٣
और अपने घरों में ठहरी रहो, और विगत अज्ञानता के युग की तरह श्रृंगार का प्रदर्शन न करो, तथा नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो तथा अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। ऐ नबी की घर वालियो! अल्लाह चाहता है कि तुमसे मलिनता को दूर कर दे और तुम्हें पूर्ण रूप से पवित्र कर दे।
तफ़सीर
और तुम अपने घरों में ठहरी रहो। इसलिए ज़रूरत के बिना घर से बाहर न निकलो और इस्लाम से पूर्व की महिलाओं की तरह अपने सौन्दर्य का प्रदर्शन न करो, जो पुरुषों को रिझाने के लिए अपने सौन्दर्य का प्रदर्शन किया करती थीं। और नमाज़ को सबसे पूर्ण रूप से अदा करो और अपने धन की ज़कात दो और अल्लाह तथा उसके रसूल का आज्ञापालन करो। ऐ अल्लाह के रसूल की पत्नियो और ऐ आपके घर वालो, अल्लाह तो चाहता है कि तुमसे कष्ट और बुराई दूर कर दे। तथा वह चाहता है कि तुम्हारी आत्माओं को; शिष्टाचार से सुसज्जित एवं दुष्ट आचरण से रहित कर, इस तरह पूर्ण रूप से शुद्ध व पवित्र कर दे कि उसके पश्चात कोई गंदगी बाकी न रहे।