وَلَقَدۡ كَانُواْ عَٰهَدُواْ ٱللَّهَ مِن قَبۡلُ لَا يُوَلُّونَ ٱلۡأَدۡبَٰرَۚ وَكَانَ عَهۡدُ ٱللَّهِ مَسۡـُٔولٗا ١٥
जबकि उन्होंने इससे पूर्व अल्लाह से प्रतिज्ञा की थी कि वे पीठ नहीं फेरेंगे। और अल्लाह से की गई प्रतिज्ञा के बारे में तो पूछा ही जाएगा।
तफ़सीर
जबकि इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) ने उहुद के दिन युद्ध से भागने के बाद अल्लाह से प्रतिज्ञा की थी कि अगर अल्लाह ने उन्हें किसी और लड़ाई में शामिल होने का अवसर दिया, तो वे अपने दुश्मन से ज़रूर लड़ाई करेंगे और उनके डर से नहीं भागेंगे। लेकिन उन्होंने वादा तोड़ दिया। हालाँकि बंदे ने अल्लाह से जो वादा किया है, उसके प्रति वह ज़िम्मेदार है और उससे उसका हिसाब लिया जाएगा।