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1 الله
अल्लाह
अल्लाह : सत्य पूज्य, जो इस बात का अधिकारी है कि उससे प्रेम किया जाए, आशा रखी जाए और भय रखा जाए। इस एक शब्द के अंदर अल्लाह के सारे असमा-ए-हुसना (सुंदर नामों) के अर्थ और उसके सारे सदगुण समाहित हैं।
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2 الرَّبّ
अर्-रब्ब (पालनहार)
पालनहार : नायक, मालिक, सुधारक और तमाम बंदों को तरह-तरह की नीमतें देकर उनका पालन-पोषण करने वाला।
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3 الرَّحْمن
अर-रहमान (अत्यंत कृपाशील)
अर-रहमान (अत्यंत कृपाशील) :महान और व्यापक कृपा, जो सब तक विस्तारित है, उसके साथत कृपा की बारिश करने वाला।
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4 الرَّحِيْم
अर-रहीम ( अति कृपाशील)
अर रहीम (अति कृपाशील) : उस बड़ी कृपा का मालिक, जिसकी कृपा सृष्टियों से जुड़ी हुई हो।
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5 الحَيّ
अल-ह़ैय्यु (सम्पूर्ण जीवन वाला)
सम्पूर्ण जीवन वाला : जिसके अंदर संपूर्ण जीवन अपने सारे अर्थों के साथ मौजूद हो। न वह अनस्तित्व से होकर गुज़रा है और न नाशवान है।
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6 القَيُّوْم
अल-क़ैयूम (जो स्वयं क़ायम हो और सबको क़ायाम रखने वाला हो)
जो स्वयं क़ायम हो और सबको क़ायाम रखने वाला हो : जो स्वयं क़ायम हो और किसी का मोहताज न हो तथा हर चीज़ उसी के द्वारा अस्तित्व में आई हो और कोई उससे बेनियाज़ न हो।
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7 الوَاحِد
अल-वाह़िद (एक)
एक : जिसकी ज़ात, गुणों और कार्यों में सारी संपूर्णताएँ निहित हों और इनमें से किसी चीज़ में उसका कोई साझी न हो।
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8 الأَحَد
अल-अह़द (अकेला)
अल-अह़द (अकेला) : जो अपने रब होने, पूज्य होने तथा नामों एवं गुणों में हर ऐतिबार से संपूर्ण और अकेला है और इन मामलों में उसका कोई साझी नहीं है।
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9 الأَوَّل
अल-अव्वल (सर्वप्रथम)
अल-अव्वल (सर्वप्रथम); जिस से पहले कुछ नहीं है।
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10 الآخِر
अल-आख़िर (सर्व अंतिम)
अल-आख़ीर (सर्व अंतिम) : जिसके बाद कुछ न हो।
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11 الظَّاهِر
अज़-ज़ाहिर (ज़ाहिर, प्रत्यक्ष)
ज़ाहिर : जिससे ऊपर कुछ न हो।
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12 البَاطِن
अल-बातिन (निकटतम)
निकटतम : जिस से अघिक निकट कुछ न हो।
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13 الوَارِث
अल-वारिस (उत्तराधिकारी)
उत्तराधिकारी : जो सृष्टियों के विनष्ट हो जाने के बाद बाक़ी रहेगा और धरती तथा उसकी सारी चीज़ों का उत्तराधिकारी बनेगा।
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14 القُدُّوْس
अल-क़ुद्दूस (पवित्र)
अल-क़ुद्दूस (पवित्र) : त्रुटियों पर आधारित सभी अवगुणों से पाक और इस बात से भी पवित्र कि कोई सृष्टि उसके जैसी हो।
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15 السُّبُّوْح
अस-सुब्बूह़ (अति पवित्र)
अति पवित्र : हर प्रकार की कमी और अवगुण से पवित्र, जिसकी पवित्रता आकाशों और धरती की सारी चीज़ें बयान करती हैं।
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16 السَّلَام
अस-सलाम (दोषरहित)
अस-सलाम (दोषरहित) : हर कमी, त्रुटि और दोष से पाक।
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17 المُؤْمِن
अल-मोमिन (पुष्टि करने वाला और शांति अर्थात डर न होने की अवस्था प्रदान करने वाला)।
अल-मोमिन : जो अपने नबियों के पक्ष में प्रमाण और मुअजिज़ात (चमत्कार) प्रस्तुत करके उनकी पुष्टि करता है, और जो उत्पीड़न से सुरछित रख के अपनी सृष्टि को शांति का आश्वासन देता है और ऐसा इसलिए है क्योंकि अल्लाह का न्याय सम्पूर्ण है।
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18 الحَقّ
अल-ह़क़्क़ (सत्य)
सत्य : जिसका अस्तित्व सत्य है और जिसके सारे नाम, गुण, कार्य, आदेश और प्रतिफल सत्य हैं और यहाँ असत्य का कोई स्थान नहीं है।
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19 المُتَكَبِّر
अल-मुतकब्बिर ( बड़ाई वाला एवं बुराई कमी और दोष से परे)
बड़ाई वाला एवं बुराई कमी और दोष से परे : जो अपनी संपूर्णता और प्रताप के कारण महान तथा हर बुराई, कमी और दोष से परे हो।
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20 العَظِيْم
अल-अ'ज़ीम (सब से महान)
सब से महान : वह जो संपूर्णता, प्रतिष्ठा, बड़ाई और महानता के सारे गुणों का मालिक हो और जिसका प्रेम हर दिल में बैठा हुआ तथा जिसकी महानता हर प्राण में बसी हुई हो।
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21 الكَبِيْر
अल-कबीर (सबसे बड़ा)
सबसे बड़ा : वह महान कि हर चीज़ उससे छोटी है और कोई चीज़ उससे बड़ी नहीं है।
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22 العَلِيّ
अल-अलिय्यु (उच्च)
उच्च : वह जो सम्मान एवं प्रतिष्ठा के ऐतिबार से, शक्ति एवं सामर्थ्य के ऐतिबार से और अपनी ज़ात के ऐतिबार से, बल्कि हर ऐतिबार से ऊँचा है।
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23 الأَعْلَى
अल-अअ'ला (सर्वोच्च)
अल-अअ'ला (सर्वोच्च) यह नाम अल्लाह के लिए हर तरह की बुलंदी को सिद्ध करता है, ज़ात, सम्मान तथा आधिपत्य की।
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24 المُتَعَال
अल-मुतआल (उच्च)
उच्च : एक ऐसी संज्ञा जो यह बतलाती है कि अल्लाह हर ऐतिबार से ऊँचा है, अपनी ज़ात के ऐतिबार से भी, मान-सम्मान के ऐतिबार से भी और शक्ति एवं सामर्थ्य के ऐतिबार से भी।
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25 اللَّطِيْف
अल-लतीफ़ (सूक्ष्मदर्शी दयावान)
सूक्ष्मदर्शी दयावान : जिससे छोटी-से छोटी चीज़ भी ओझल न रहे और जो अपने बंदों पर उपकार करने वाला हो कि उनके साथ नर्मी का मामला करे और उन्हें उन बातों की तौफ़ीक़ प्रदान करे, जो उनके हित में हों।
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26 الحَكِيْم
अल-ह़कीम (सम्पूर्ण हिकमत वाला)
अल-ह़कीम (सम्पूर्ण हिकमत वाला): वह जिसके सभी आदेश और धार्मिक विधान(शरई अहकाम) हिकमत से परिपूर्ण हैं और जो अपनी सृष्टियों के बीच निर्णय करने के मामले में भी हिकमत के साथ संपूर्णतया विशेषित है।
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27 الوَاسِع
अल-वासिउ ( सबसे विशाल)
सबसे विशाल : जिसके सारे गुण पूर्णतम दर्जे और सर्वाधिक मात्रा में हो।
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28 العَلِيْم
अल-अ'लीम (सब कुछ जानने वाला)
सब कुछ जानने वाला : वह जिसने सारी चीज़ों को अपने ज्ञान के दायरे में ले रखा है।
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29 المَلِك
अल-मलिक (बादशाह)
अल-मलिक (बादशाह) : जो महानता, आधिपत्य और व्यवस्था करने के गुणों से विशेषित तथा तमाम वस्तुओं का मालिक एवं उन्हें अपने हिसाब से संचालित करने वाला हो और इस कार्य में न उसकी कोई प्रतिस्पर्धा करने वाला हो और ना अड़चनें खड़ी करने वाला।
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30 الحَمِيْد
अल-हमीद (प्रशंसनीय)
प्रशंसनीय : अल्लाह का ऐसा नाम, जो यह बताता है कि सारी प्रशंसाएँ और संपूर्णताएँ अल्लाह के लिए हैं। वह अपनी हस्ती, नामों, गुणों और कार्यों की संपूर्णता के कारण प्रशंसा के लायक़ है।
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31 الخَبِيْر
अल-ख़बीर (सब वस्तुओं की हर परकार से ज्ञान रखने वाला)
सब वस्तुओं की हर परकार से ज्ञान रखने वाला : जो हर चीज़ के ज़ाहिर के साथ-साथ उसके भीतर और अंदर की बातों से भी अवगत हो।
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32 المَجِيْد
अल-मजीद (प्रतिष्ठावान)
प्रतिष्ठावान : जो संपूर्णता पर आधारित गुणों में से बहुत-से प्रतिष्ठा वाले गुणों से विशेषित हो।
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33 القَوِيّ
अल-क़विय्यु (असीम शक्तिशाली)
असीम शक्तिशाली : संपूर्ण शक्ति का मालिक, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता और जिसके निर्णय को कोई टाल नहीं सकता।
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34 المَتِيْن
अल-मतीन (नितांत शक्तिवान)
नितांत शक्तिवान : नितांत शक्ति एवं सामर्थ्य का मालिक, जो न कमज़ोरी महसूस करता है न तकान।
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35 العَزِيْز
अल- अ'ज़ीज़ (अत्यंत प्रभावशाली)
अल- अ'ज़ीज़ (अत्यंत प्रभावशाली) : जो संपूर्ण प्रतिष्ठा तथा शक्ति का मालिक है तथा जिसकी शक्ति और आधिपत्य के सामने हर चीज़ नतमस्तक है।
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36 القَاهِر
अल-क़ाहिर (सम्पूर्ण वर्चस्व वाला)
सम्पूर्ण वर्चस्व वाला : जिसके आगे सारी कायनात नतमस्तक हो, सारी सृष्टियाँ विनीत बनकर खड़ी हों और सारी चीज़ें उसी के सामर्थ्य के आगे झुकती हों और उस के इरादे के अनुसार चलती हों।
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37 القَادِر
अल-क़ादिर (सम्पूर्ण सक्षम)
सम्पूर्ण सक्षम : जो हर चीज़ पर संपूर्ण सामर्थ्य रखता है, जिसे न कोई चीज़ विवश कर सकती है और न उससे कोई चीज़ छूट सकती है।
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38 القَدِيْر
अल-क़दीर (सामर्थ्यवान)
सामर्थ्यवान : पूर्ण सामर्थ्य वाला, जो न विवश होता हो और न थकता हो।
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39 المُقْتَدِر
अल-मुक़तदिर (बड़ा सामर्थ्यवान)
बड़ा सामर्थ्यवान : जो संपूर्ण सामर्थ्य का मालिक है और जिसके वश से बाहर कोई चीज़ नहीं है।
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40 الجَبَّار
अल-जब्बार (सर्वोच्च, अधिपति, दयावान)
अल-जब्बार (सर्वोच्च, अधिपति, दयावान) : अपनी सृष्टि से ऊँचा और जिसको हर चीज़ पर पूर्ण आधिपत्य एवं एकाधिकार प्राप्त है, जिसके सामने हर चीज़ झुकी है और जो अपने यहाँ शरण लेने वाले का हर दुख दूर करता है।
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41 الخَالِق
अल-ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता)
सृष्टिकर्ता : बिना किसी नमूने के सारी वस्तुओं को अस्तित्व प्रदान करने वाला और पैदा करने वाला।
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42 البَارِئ
अल-बारियो (पैदा करने वाला)
अल-बारियो (पैदा करने वाला): वह जिसने सारी सृष्टियों की रचना की, उन्हें अलग-अलग रूप रंग दिए और अनस्तित्व से अस्तित्व प्रदान किया।
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43 المُصَوِّر
अल-मुसव्विर (रूप तथा आकार देने वाला)
रूप तथा आकार देने वाला : जिसने अपनी सृष्टियों को अलग-अलग रंग-रूप तथा भिन्न-भिन्न बनावट देकर पैदा किया, जो उसके संपूर्ण ज्ञान और हिकमत का प्रमाण हैं।
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44 المُهَيْمِن
अल-मुहैमिन (शासक,संरक्षक, संचालक, ज्ञाता )
अल-मुहैमिन (शासक,संरक्षक, संचालक, ज्ञाता ) : सृष्टियों की निगरानी करने वाला, उनका वास्तविक शासनकर्ता और उनपर अपना आदेश चलाने वाला, जिसने हर चीज़ को अपने ज्ञान के दायरे में ले रखा है।
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45 الحَفِيْظ
अल-ह़फीज़ (रक्षा करने वाला)
रक्षा करने वाला : जो अपनी पैदा की हुई चीज़ों की रक्षा करता है, उनके बारे में पूरी जानकारी रखता है, अपने 'औलिया' (सारे ईमान और तक़वा की राह पर चलने वाले बंदों) को गुनाहों और विनाश के कार्यों से बचाता है और उनके कर्मों का हिसाब रखता तथा उन्हीं के अनुसार प्रतिफल प्रदान करता है।
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46 الوَلِيّ
अल-वली (सहायक)
सहायक : अपने मोमिन बंदों का सहायक और सारी सृष्टियों को ज़रूरत की चीज़ें देने वाला।
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47 المَوْلَى
अल-मौला (स्वामी)
स्वामी : सारी सृष्टियों का स्वामी, यानी उन का नायक, सृष्टिकर्ता और सत्य पूज्य तथा अपने मोमिन बंदों का मौला एवं आक़ा जिनसे वह प्रेम करता है, जिन्हें सामर्थ्य देता है, जिन की सहायता करता है और जिन्हें लाभ की सारी वस्तुएँ देता है और धार्मिक तथा सांसारिक रूप से लाभदायक कामों को उन के लिए आसान कर देता है।
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48 النَّصِيْر
अन-नसीर (मददगार)
मददगार : जो अपने मोमिन बंदों की मदद और सहायता करता है।
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49 النَّاصِر
अन-नासिर (मददगार)
मददगार : जो अपने जिस बंदे के लिए चाहता है, आधिपत्य और जीत सुनिश्चित कर देता है।
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50 الوَكِيْل
अल-वकील (काम बनाने वाला)
काम बनाने वाला : अपनी सृष्टियों को रोज़ी देने का जमानतदार, उनके हितों का रक्षक और अपने औलिया का दोस्त कि उनके लिए आसानियाँ उपलब्ध करता है, कठिनाइयों से बचाता है और उनके सारे मामले हल करता है।
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51 الكَفِيْل
अल-कफ़ील (जमानतदार)
जमानतदार : जो सृष्टियों के सारे मामलों को हल करता हो और उनकी रोज़ी तथा ज़रूरत की अन्य वस्तुओं का जमानतदार हो।
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52 الكَافِي
अल-काफ़ी(किफ़ायत करने वाला)
किफ़ायत करने वाला अर्थात प्राप्य : जो अकेले बंदों को ज़रूरत की सारी चीज़ें देने के लिए काफ़ी है, जिसकी सहायता के बाद किसी और की सहायता की आवश्यकता नहीं रहती तथा जिसकी सहायता के बाद दूसरों से बेनियाज़ी प्राप्त हो जाती है।
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53 الصَّمَد
अस-समद (संपूर्ण पालनहार और महान प्रभु तथा सब की मुराद )
अस-समद : संपूर्ण पालनहार और महान प्रभु तथा जिसका इरादा हर ज़रूरत के समय चाहत और भय के साथ किया जाता है।
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54 الرَّزَّاق
अर-रज़्ज़ाक़ (रोज़ी देने वाला)
रोज़ी देने वाला : जो बंदों को रोज़ी देने का जमानतदार है, जो उनके दिलों और शरीरों की क्रियाशीलता के लिए अति आवश्यक है।
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55 الفَتَّاح
अल-फ़त्ताह़ (निर्णय करने वाला एवं आदेश तथा बदला देने वाला)
निर्णय करने वाला एवं आदेश तथा बदला देने वाला : जो अपने धर्म-विधानों(शरई आदेशों) का लोगों को पाबंद बनाता है, अपने सांसारिक फ़ैसले (तक़दीर तथा भाग्य) उन पर लागू करता है और प्रतिफल से संबंधित अहकाम के ज़रिए उनका हिसाब-किताब लेगा।
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56 المُبِيْن
अल-मुबीन (स्पष्ट तथा स्पष्ट करने वाला)
स्पष्ट एवं स्पष्ट करने वाला : जिसके बारे में यह स्पष्ट है कि वह एक है, उसका कोई साझी नहीं है तथा जो अपने बंदों के लिए सत्य को स्पष्ट करता है।
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57 الهَادِي
अल-हादी (मार्गदर्शक)
मार्गदर्शक : जो अपने बंदों को सभी लाभों की ओर मार्गदर्शन करता है तथा हर प्रकार की हानि से बचाव का उन्हें राह दिखाता है, और अपने बंदों में से जिसे चाहता है, सत्य का मार्ग अपनाने का सुयोग प्रदान करता है।
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58 الحَكَم
अल-ह़कम (फ़ैसला करने वाला, निर्णायक)
फ़ैसला करने वाला : जो हर चीज़ का फ़ैसला करता है और जो चाहे फ़ैसला करता तथा अपने बंदों के बीच सत्य और न्याय के आधार पर फ़ैसला करता है।
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59 الرَّؤُوْف
अर-रऊफ़ (अत्यंत करुणामय)
अर-रऊफ़ (अत्यंत करुणामय) : वह जो अपने बंदों के हक़ में बड़ा करुणामय और दयावान है।
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60 الوَدُوْد
अल-वदूद (अत्यधिक प्रेम करने वाला तथा प्रेम किया जाने वाला)
अत्यधिक प्रेम करने वाला तथा प्रेम किया जाने वाला : यानी प्रेम करने वाला और प्रिय दोनों। वह अपने नबियों, रसूलों और उनके मानने वालों से प्रेम करता है और वे भी उससे प्रेम करते हैं।
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61 البَرّ
अल-बर्र (अत्यंत परोपकारी)
अत्यंत परोपकारी : वह परोपकारी जिसने बंदों को तरह-तरह की नीमतें दे रखी हैं।
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62 الحَلِيْم
अल-ह़लीम (सर्वोच्च सहनशील)
सर्वोच्च सहनशील : वह सहनशील अल्लाह जो अपने बंदों को उनके गुनाहों का बदला देने के मामले में जल्दबाज़ी से काम नहीं लेता।
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63 الغَفُوْر
अल-ग़फ़ूर (अत्यंत क्षमाशील)
अत्यंत क्षमाशील : वह जो अपने बंदों को उनके गुनाहों की बुराई से बचाता है और उन्हें उनकी सज़ा नहीं देता।
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64 العَفُوّ
अल-अफ़ुव्वु (सब से अधिक माफ़ करने वाला)
सब से अधिक माफ़ करने वाला : जो गुनाहों को मिटा देता और पापों को नज़रंदा़ज़ करता है।
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65 التَّوَّاب
अत्तव्वाब (तौबा क़बूल करने वाला)
तौबा क़बूल करने वाला : वह जो बंदे को तौबा करने का सुयोग प्रदान करता है और उसकी तौबा को ग्रहण भी करता है।
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66 الكَرِيْم
अल-करीम (स्नेह करने वाला)
स्नेह करने वाला : बड़ी भलाई और बड़े लाभ वाला।
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67 الأَكْرَم
अल-अकरम (दानशील तथा बड़ी भलाई वाला)
दानशील तथा बड़ी भलाई वाला: बड़ी भलाई वाला और दान करने वाला, जिसके हाथ में सारी भलाई है और सारी भलाइयाँ जिसकी ओर से प्राप्त होती हैं।
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68 الشَّاكِر
अश-शाकिर (प्रशंसक और सबसे अच्छा बदला लेने वाला)
अश-शाकिर (प्रशंसक और सबसे अच्छा बदला लेने वाला) : अपने आज्ञाकारी बंदों की प्रशंसा एवं तारीफ़ करने वाला और उन्हें उनके आज्ञापालन का अधिकार से कहीं अधिक प्रतिफल देने वाला।
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69 الشَّكُوْر
अश-शकूर (गुणग्राही)
गुणग्राही : जो छोटे-से अमल को सम्मान देते हुए बदले में कई गुणा सवाब प्रदान करता है और बहुत-से गुनाहों को माफ़ भी कर देता है।
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70 السَّمِيْع
अस्समी (सब कुछ सुनने वाला)
सब कुछ सुनने वाला : जो सुनने से संबंधित सभी चीज़ों को सुनता है। अतः, भेदों और कानाफूसियों को भी सुन लेता है और उसके यहाँ ज़ोर से बोलना और धीरे से बोलना तथा बोलना और चुप रहना सब बराबर है।
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71 البَصِيْر
अल-बसीर (सब कुछ देखने वाला)
अल-बसीर (सब कुछ देखने वाला): जिसकी निगाहों से कोई छोटी से छोटी चीज़ भी ओझल नहीं हो सकती। हर चीज़ को देखने वाला, हर चीज़ की सूचना रखने वाला और हर रहस्य का ज्ञान रखने वाला।
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72 الشَّهِيْد
अश्-शहीद (हर वस्तू का गवाह और ज्ञाता)
हर वस्तू का गवाह और ज्ञाता : वह जिससे कोई वस्तु ओझल नहीं होती, बल्कि वह हर चीज़ की सूचना रखता है, हर वस्तु को देख रहा है और हर वस्तु से संबंधित हर बात से अवगत है।
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73 الرَّقِيْب
अर-रक़ीब (रक्षा तथा निगरानी करने वाला)
रक्षा तथा निगरानी करने वला : हर चीज़ की सूचना रखने वाला, छिपी हुई और दिल की बातों को जानने वाला, जो सब कुछ देखता और सुनता है तथा कोई भेद और कानाफूसी उससे छिपी नहीं रहती।
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74 القَرِيْب
अल-क़रीब (निकट)
निकट : जो अपने आज्ञाकारी बंदे को प्रतिफल प्रदान करने के मामले में निकट हो, पुकारने वाले की पुकार सुनने के मामले में क़रीब हो और सारे बंदों से इस मामले में निकट हो कि उनकी हर छोटी-बड़ी बात को जानता हो और यह अल्लाह के सब से ऊँचा होने के विपरीत नहीं है।
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75 المُجِيْب
अल-मुजीब (दुआ ग्रहण करने वाला)
दुआ ग्रहण करने वाला : जो माँगने वालों की मुराद पूरी करता है और दुआ करने वालों की दुआ ग्रहण करता है।
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76 المُحِيْط
अल-मुह़ीत (सब को अपने घेरे में रखने वाला)
सब को अपने घेरे में रखने वाला : अल्लाह का एक नाम, जो यह बतलाता है कि वह अपनी सृष्टि से ऊँचा है और ज्ञान, सामर्थ्य और पराक्रम द्वारा हर वस्तू को अपने घेरे में ले रखा है।
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77 الحَسِيْب
अल-ह़सीब (हिसाब लेने वाला एवं काफ़ी)
हिसाब लेने वाला तथा काफ़ी: जो अपने मोमिन बंदों के लिए जो उसपर भरोसा रखते हों, काफ़ी है तथा अपने बंदों के कर्मों से अवगत है और उनसे उनका हिसाब लेने वाला है।
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78 الغَنِيّ
अलग़निय्यु (सीमारहित निस्पृह, बेनियाज़)
सीमारहित निस्पृह : वह जिसका मोहताज हर कोई हो, लेकिन वह किसी का मोहताज न हो।
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79 الوَهَّاب
अल-वह्हाब (बहुत ज़्यादा प्रदान करने वाला)
बहुत ज़्यादा प्रदान करने वाला : अत्यधिक दानशील, जिसकी दानशीलता का कर्णधार कायनात का कण-कण है।
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80 المُقِيْت
अल-मुक़ीत (रोज़ी निर्धारित करने वाला तथा उसे पहुंचाने वाला)
रोज़ी निर्धारित करने वाला तथा उसे पहुंचाने वाला : जो अपने ज्ञान के मुताबिक़ सृष्टियों की रोज़ी निर्धारित करता है और अपनी सामर्थ्य से उन्हें रोज़ी प्रदान करता है और उनके बीच बाँटता है।
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81 المُقَدِّم
अल-मुक़द्दिम (आगे करने वाला)
आगे करने वाला : जो हर चीज़ को उसी स्थान में रखता है, जो उसके लायक़ है। जिसे चाहता है आगे करता और जिसे चाहता है पीछे करता है।
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82 المُؤَخِّر
अल-मुअख्खिर (पीछे करने वाला)
पीछे करने वाला : जो पीछे किए जाने लायक़ वस्तुओं को पीछे करके उन्हें उनके स्थान पर रखता है।
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83 الرَّفِيْق
अर-रफ़क़(नरमी करने वाला)
नरमी करने वाला : सारे मामलों में नरमी से काम लेने वाला, जो अवज्ञाकारियों को सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।
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84 المَنَّان
अल-मन्नान (बिन माँगे देने वाला)
बिन माँगे देने वाला : उपकारी तथा दानी, जो बिन माँगे ही सब को देता है।
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85 الجَوَاد
अल-जवाद (सबसे बड़ा दानी)
सबसे बड़ा दानी :सबसे बड़ा दाता और महादानी जिसके इस गुण का लाभ सारी कायनात उठा रही है।
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86 المُحْسِن
अल-मुह़सिन (एहसान करने वाला)
एहसान करने वाला : जो अपने बंदों को तरह-तरह की दिखने वाली और न दिखने वाली नीमतें प्रदान करता है।
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87 الدَّيَّان
अद-दैयान (प्रतिफल प्रदान करने वाला)
प्रतिफल प्रदान करने वाला : जो बंदों को उनके कर्मों के अनुसार प्रतिफल प्रदान करता है और उनसे हिसाब-किताब भी लेगा।
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88 الشَّافِي
अश्-शाफ़ी (शिफ़ा देने वाला)
शिफ़ा देने वाला : जो बंदों को शारीरिक रोगों, दिल के संदेहों और हृदय की विलासिताओं से सलामती प्रदान करता है।
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89 السَّيِّد
अस-सय्यिद (सरदार)
सरदार : पालनहार, मालिक तथा वास्तविक सरदार (प्रमुख), जिसकी ओर दुनिया तथा आख़िरत से संबंधित सारे मामलों में सारी सृष्टियाँ लौटती हैं।
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90 الوِتْر
अल-वित्र (बेजोड़)
बेजोड़ : वह एक-अकेला जिसका कोई साझी और समकक्ष न हो।
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91 الحَيِيّ
अल-ह़यिय्यु (ह़या करने वाला)
हया करने वाला : बहुत ज़्यादा हया करने वाला। मालूम रहे कि अल्लाह की हया, सृष्टियों की हया की तरह नहीं है बल्कि इससे अभिप्राय उन चीज़ों को छोड़ देना है, जो अल्लाह की असीम कृपा, अपार दानशीलता और अनंत क्षमाशीलता तथा अत्यंत सहनशीलता से मेल नहीं खातीं।
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92 الطَّيِّب
अत-तय्यिब (पवित्र)
पाक : यानी अल्लाह हर कमी और अवगुण से पाक है।
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93 المُعْطِي
अल-मुअतियु (प्रदान करने वाला)
प्रदान करने वाला : प्रदान करने का गुण वास्तविक रूप से केवल उसी के पास है। वह दे, तो कोई रोकने वाला नहीं और रोक ले, तो कोई देने वाला नहीं।
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94 الجَمِيْل
अल-जमील (सबसे सुंदर)
सबसे सुंदर : जिसकी हस्ती, सारे नाम, सभी गुण और समस्त कार्य सबसे सुंदर एवं मनमोहक हैं।
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95 الإِلَه
अल-इलाह (सत्य पूज्य)
अल-इलाह (सत्य पूज्य) : वह जो संपूर्णता के सभी गुण और प्रताप की सभी विशेषताएँ अपने अंदर रखता हो तथा ऐसा पूज्य कि उसके सिवा कोई इबादत का अधिकारी न हो।
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96 الرَّافِع
अर्-राफ़े (बुलंदी प्रदान करने वाला)
बुलंदी प्रदान करने वाला : जो जिसे चाहता है, जैसे चाहता है, बुलंदी प्रदान करता है जैसे कि अपने औलिया को दुनिया तथा आख़िरत में ऊँचा स्थान प्रदान करता है।
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97 ذُو الجَلالِ والإِكْرامِ
ज़ुल-जलालि वल इकराम (प्रतापी एवं उपकारी)
प्रतापी एवं उपकारी : महानता, बड़ाई, दया और दालशीलता जैसे गुणों से विशेषित तथा सम्मान एवं प्रशंसा का अधिकारी।
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98 أحسن الخالقين
अहसनुल ख़ालिक़ीन (सबसे अच्छा अनुमानकारी सबसे उत्तम सृष्टिकर्ता)
सबसे अच्छा अनुमानकारी, सबसे उत्तम रचनाकार और रूप देने वाला, जिसकी तरह कोई कुछ बना नहीं सकता।
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