قَالَ لَنۡ أُرۡسِلَهُۥ مَعَكُمۡ حَتَّىٰ تُؤۡتُونِ مَوۡثِقٗا مِّنَ ٱللَّهِ لَتَأۡتُنَّنِي بِهِۦٓ إِلَّآ أَن يُحَاطَ بِكُمۡۖ فَلَمَّآ ءَاتَوۡهُ مَوۡثِقَهُمۡ قَالَ ٱللَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٞ ٦٦
उस (याक़ूब) ने कहा : मैं उसे तुम्हारे साथ हरगिज़ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि तुम मुझसे अल्लाह के नाम पर प्रतिज्ञा करो कि उसे मेरे पास अवश्य लाओगे, सिवाय इसके कि तुम (सब) को घेर लिया20 जाए। फिर जब उन्होंने उसे अपना दृढ़ वचन दिया, तो उस (याक़ूब) ने कहा : हम जो कुछ कह रहे हैं, उसपर अल्लाह निरीक्षक (गवाह) है।
फ़ुटनोट
20 अर्थात विवश कर दिए जाओ।
तफ़सीर
उनके पिता ने उनसे कहा : मैं उसे तुम्हारे साथ हरगिज़ नहीं भेजूँगा, यहाँ तक कि तुम मुझे अल्लाह का दृढ़ वचन दो कि उसे मेरे पास वापस लाओगे, सिवाय इस स्थिति के कि तुम सब को विनाश घेर ले और तुममें से कोई न बचे, और तुम उसे न रोकने में सक्षम हो और न ही वापस लौटने में। जब उन्होंने याक़ूब अलैहिस्सलाम को अल्लाह का दृढ़ वचन दे दिया, तो उन्होंने कहा : हम जो कुछ कह रहे हैं, उसपर अल्लाह गवाह है। इसलिए उसकी गवाही हमारे लिए पर्याप्त है।