يَعۡلَمُ مَا يَلِجُ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا يَخۡرُجُ مِنۡهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا يَعۡرُجُ فِيهَاۚ وَهُوَ ٱلرَّحِيمُ ٱلۡغَفُورُ ٢
वह जानता है जो कुछ धरती के भीतर प्रवेश होता है और जो कुछ उससे निकलता1 है, तथा जो कुछ आकाश2 से उतरता है और जो कुछ उसमें3 चढ़ता है। तथा वह अत्यंत दयावान्, अति क्षमाशील है।
फ़ुटनोट
1 जैसे वर्षा, कोष और निधि आदि।
2 जैसे वर्षा, ओला, फ़रिश्ते और आकाशीय पुस्तकें आदि।
3 जैसे फ़रिश्ते तथा कर्म।
तफ़सीर
वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है, जैसे पानी और वनस्पतियाँ, और वह जानता जो कुछ पौधे आदि उससे निकलते हैं, और वह जानता है जो कुछ आकाश से बारिश, फ़रिश्ते और आजीविका उतरती है, और वह जानता है जो कुछ आकाश की ओर फ़रिश्ते, बंदों के कर्म तथा उनकी आत्माएँ चढ़ती हैं। और वह अपने ईमान वाले बंदों पर बड़ा दयालु, और जो उससे तौबा करते हैं उनके पापों को क्षमा करने वाला है।