Rabbi awzi'ni

अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari

وَوَصَّيۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ بِوَٰلِدَيۡهِ إِحۡسَٰنًاۖ حَمَلَتۡهُ أُمُّهُۥ كُرۡهٗا وَوَضَعَتۡهُ كُرۡهٗاۖ وَحَمۡلُهُۥ وَفِصَٰلُهُۥ ثَلَٰثُونَ شَهۡرًاۚ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ أَشُدَّهُۥ وَبَلَغَ أَرۡبَعِينَ سَنَةٗ قَالَ رَبِّ أَوۡزِعۡنِيٓ أَنۡ أَشۡكُرَ نِعۡمَتَكَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَيَّ وَأَنۡ أَعۡمَلَ صَٰلِحٗا تَرۡضَىٰهُ وَأَصۡلِحۡ لِي فِي ذُرِّيَّتِيٓۖ إِنِّي تُبۡتُ إِلَيۡكَ وَإِنِّي مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ١٥

और हमने मनुष्य को अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने की ताकीद दी। उसकी माँ ने उसे दुःख झेलकर गर्भ में रखा तथा दुःख झेलकर जन्म दिया और उसकी गर्भावस्था की अवधि और उसके दूध छोड़ने की अवधि तीस महीने है।12 यहाँ तक कि जब वह अपनी पूरी शक्ति को पहुँचा और चालीस वर्ष का हो गया, तो उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर कि मैं तेरी उस अनुकंपा के लिए आभार प्रकट करूँ, जो तूने मुझपर और मेरे माता-पिता पर उपकार किए हैं। तथा यह कि मैं वह सत्कर्म करूँ, जिसे तू पसंद करता है तथा मेरे लिए मेरी संतान को सुधार दे। निःसंदेह मैंने तेरी ओर तौबा की तथा निःसंदेह मैं मुसलमानों (आज्ञाकारियों) में से हूँ।

फ़ुटनोट

12 इस आयत तथा क़ुरआन की अन्य आयतों में भी माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने पर विशेष बल दिया गया है। तथा उनके लिए प्रार्थना करने का आदेश दिया गया है। देखिए : सूरत बनी इसराईल, आयत : 170। ह़दीसों में भी इस विषय पर अति बल दिया गया है। आदरणीय अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि एक व्यक्ति ने आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि मेरे सद्व्यवहार का अधिक योग्य कौन है? आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : तेरी माँ। उसने कहा : फिर कौन? आप ने कहा : तेरी माँ। उसने कहा : फिर कौन? आप ने कहा : तेरी माँ। चौथी बार आपने कहा : तेरे पिता। (सह़ीह़ बुख़ारी : 5971, सह़ीह़ मुस्लिम : 2548)

तफ़सीर

हमने निश्चित रूप से मनुष्य को आदेश दिया है कि अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करे। उनका उनके जीवन के दौरान और उनकी मृत्यु के बाद इस तरह से आदर-सम्मान करे कि उसमें शरीयत का उल्लंघन न हो। विशेष रूप से अपनी माँ का ध्यान रखे, जिसने उसे कठिनाई से (गर्भ में) उठाए रखा और कठिनाई से उसे जन्म दिया। उसके गर्भ में रहने और दूध छुड़ाने की शुरुआत तक की अवधि : तीस महीना है। यहाँ तक कि जब वह अपनी मानसिक और शारीरिक शक्ति की पूर्णता को पहुँच गया और चालीस वर्ष का हो गया, तो उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मुझे प्रेरणा दे कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ, जो तूने मुझे तथा मेरे माता-पिता को प्रदान की है, तथा मुझे प्रेरणा दे कि मैं वह नेक काम करूँ, जिसे तू पसंद करता है और उसे मेरी ओर से क़बूल कर ले, और मेरे लिए मेरी संतान को सुधार दे। मैं तेरे सामने अपने गुनाहों से तौबा करता हूँ, तथा मैं उन लोगों में से हूँ जो तेरी आज्ञाकारिता के अधीन हैं और तेरे आदेशों के प्रति समर्पित हैं।

पूरी सूरह Al-Ahqaf पढ़ें

सवाल-जवाब

Rabbi awzi'ni क़ुरआन में कहां है?

Rabbi awzi'ni सूरह Al-Ahqaf, 46:15 में है।