قُلۡ مَن كَانَ فِي ٱلضَّلَٰلَةِ فَلۡيَمۡدُدۡ لَهُ ٱلرَّحۡمَٰنُ مَدًّاۚ حَتَّىٰٓ إِذَا رَأَوۡاْ مَا يُوعَدُونَ إِمَّا ٱلۡعَذَابَ وَإِمَّا ٱلسَّاعَةَ فَسَيَعۡلَمُونَ مَنۡ هُوَ شَرّٞ مَّكَانٗا وَأَضۡعَفُ جُندٗا ٧٥
(हे नबी!) आप कह दें कि जो व्यक्ति गुमराही में पड़ा हुआ है, तो रहमान उसे एक अवधि तक मोहलत देता है। यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है; या तो यातना और या क़ियामत, तो वे अवश्य जान लेंगे कि कौन स्थिति में अधिक बुरा और जत्थे की दृष्टि से अधिक कमज़ोर है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) आप कह दें : जो गुमराही में भटक रहा है, 'रहमान' उसे ढील देगा, ताकि वह गुमराही में और बढ़ जाए। यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है; इस दुनिया में जल्दी मिलने वाली या क़ियामत के दिन स्थगित कर दी गई यातना, तो उस समय उन्हें पता चल जाएगा कि कौन बुरे स्थान वाला और सबसे कम सहायक वाला है, यह उनका समूह है या मोमिनों का समूह?