فَٱخۡتَلَفَ ٱلۡأَحۡزَابُ مِنۢ بَيۡنِهِمۡۖ فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن مَّشۡهَدِ يَوۡمٍ عَظِيمٍ ٣٧
फिर इन गिरोहों13 ने आपस में मतभेद कर लिया, तो उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया, एक बड़े दिन की उपस्थिति के कारण बड़ा विनाश है।
फ़ुटनोट
13 अर्थात अह्ले किताब के गिरोहों ने ईसा अलैहिस्सलाम की वास्तविकता जानने के पश्चात् उनके विषय में मतभेद किया। यहूदियों ने उसे जादूगर तथा वर्णसंकर (व्यभिचार से उत्पन्न व्यक्ति) कहा। और ईसाइयों के एक गिरोह ने कहा कि वह स्वयं अल्लाह है। दूसरे ने कहा : वह अल्लाह का पुत्र है। और उनके तीसरे कैथुलिक गिरोह ने कहा कि वह तीन में का तीसरा है। बड़े दिन से अभिप्राय प्रलय का दिन है।
तफ़सीर
फिर लोग ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में मतभेद के शिकार हो गए और अलग-अलग गिरोहों में बँट गए। उनमें से कुछ लोग उसपर ईमान लाए और कहा : वह एक रसूल है। जबकि कुछ लोगों ने उसपर विश्वास नहीं किया, जैसा कि यहूदियों का हाल रहा। इसी तरह कुछ संप्रदायों ने उसके बारे में अतिशयोक्ति की। उनमें से कुछ ने कहा कि वह अल्लाह है और कुछ ने कहा कि वह अल्लाह का बेटा है। सच्चाई यह है कि अल्लाह इन सारी बातों से ऊँचा है। अतः उसके बारे में मतभेद करने वालों के लिए क़ियामत के दिन बड़ा विनाश है, जिस दिन भयावह परिस्थितियों का सामना होगा, हिसाब-किताब के दौर से गुज़रना होगा और सज़ा भुगतनी होगी।