أَفَأَنتَ تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ أَوۡ تَهۡدِي ٱلۡعُمۡيَ وَمَن كَانَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ ٤٠
फिर क्या आप बहरों को सुनाएँगे या अंधों को राह दिखाएँगे और उनको जो खुली गुमराही15 में पड़े हैं?
फ़ुटनोट
15 अर्थ यह है कि जो सच को न सुने तथा दिल का अंधा हो, तो आपके सीधी राह दिखाने का उसपर कोई प्रभाव नहीं होगा।
तफ़सीर
ये लोग सत्य सुनने से बहरे और उसे देखने से अंधे हैं। तो क्या (ऐ रसूल!) आप बहरे को सुना सकते हैं, अथवा अंधे को रास्ता दिखा सकते हैं, अथवा उन्हें राह पर ला सकते हैं, जो सीधे मार्ग से खुले तौर पर भटके हुए हैं?!