كَيۡفَ يَكُونُ لِلۡمُشۡرِكِينَ عَهۡدٌ عِندَ ٱللَّهِ وَعِندَ رَسُولِهِۦٓ إِلَّا ٱلَّذِينَ عَٰهَدتُّمۡ عِندَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۖ فَمَا ٱسۡتَقَٰمُواْ لَكُمۡ فَٱسۡتَقِيمُواْ لَهُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُتَّقِينَ ٧
इन मुश्रिकों (बहुदेववादियों) की अल्लाह और उसके रसूल के पास कोई संधि कैसे हो सकती है, सिवाय उनके जिनसे तुमने सम्मानित मस्जिद (काबा) के पास संधि की4 थी? तो जब तक वे तुम्हारे लिए (वचन पर) क़ायम रहें, तो तुम भी उनके लिए क़ायम रहो। निःसंदेह अल्लाह परहेज़गारों से प्रेम करता है।
फ़ुटनोट
4 इससे अभिप्रेत ह़ुदैबिया की संधि है, जो सन् (6) हिजरी में हुई थी। जिसे काफ़िरों ने तोड़ दिया। और यही सन् (8) हिजरी में मक्का के विजय का कारण बना।
तफ़सीर
यह उचित नहीं है कि अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों की अल्लाह और उसके रसूल के पास कोई संधि तथा सुरक्षा का वचन हो, सिवाय उन बहुदेववादियों के वचन के, जिनके साथ (ऐ ईमान वालो!) तुमने मस्जिदे-हराम के पास हुदैबिय्यह की संधि में समझौता किया था। तो जब तक वे तुम्हारे लिए उस वचन पर क़ायम रहें जो तुम्हारे और उनके बीच है और उसे न तोड़ें, तो तुम भी उनके लिए उसपर क़ायम रहो और उसे न तोड़ो। निःसंदेह अल्लाह अपने मुत्तक़ी बंदों से प्रेम करता है, जो उसके आदेशों का पालन करते और उसके निषेधों से दूर रहते हैं।