सूरह At-Tawbah, आयत 65

9:65

وَلَئِن سَأَلۡتَهُمۡ لَيَقُولُنَّ إِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلۡعَبُۚ قُلۡ أَبِٱللَّهِ وَءَايَٰتِهِۦ وَرَسُولِهِۦ كُنتُمۡ تَسۡتَهۡزِءُونَ ٦٥

निःसंदेह यदि आप30 उनसे पूछें, तो वे अवश्य ही कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे। आप कह दें : क्या तुम अल्लाह और उसकी आयतों और उसके रसूल के साथ मज़ाक कर रहे थे?

फ़ुटनोट

30 तबूक की यात्रा के दौरान मुनाफ़िक़ लोग, नबी तथा इस्लाम के विरुद्ध बहुत-सी दुःखदायी बातें कर रहे थे।

तफ़सीर

और यदि (ऐ रसूल!) आप मुनाफ़िक़ों से उसके बारे में पूछें, जो उन्होंने व्यंग्य किया है और मोमिनों को बुरा-भला कहा है, जबकि अल्लाह ने आपको उसके बारे में सूचित कर दिया, तो वे अवश्य कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे, हम गंभीर मुद्रा में नहीं थे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुम अल्लाह, उसकी आयतों और उसके रसूल का मज़ाक़ उड़ा रहे थे?!