وَإِذَا مَآ أُنزِلَتۡ سُورَةٞ نَّظَرَ بَعۡضُهُمۡ إِلَىٰ بَعۡضٍ هَلۡ يَرَىٰكُم مِّنۡ أَحَدٖ ثُمَّ ٱنصَرَفُواْۚ صَرَفَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُم بِأَنَّهُمۡ قَوۡمٞ لَّا يَفۡقَهُونَ ١٢٧
और जब भी कोई सूरत उतारी जाती है, तो उनमें से कुछ एक-दूसरे की तरफ देखते हैं कि क्या तुम्हें कोई देख रहा है? फिर वे वापस पलट जाते हैं। अल्लाह ने उनके दिलों को फेर दिया है, क्योंकि निःसंदेह वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।
तफ़सीर
और जब अल्लाह अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत उतारता है, जिसमें मुनाफ़िक़ों की स्थितियों का ज़िक्र होता है, तो कुछ मुनाफ़िक़ यह कहते हुए एक-दूसरे को देखते हैं : क्या तुम्हें कोई देख रहा है? यदि कोई उन्हें न देख रहा हो, तो मजलिस से चले जाते हैं। सुन लो! अल्लाह ने उनके दिलों को मार्गदर्शन और भलाई से फेर दिया है और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।