وَٱلۡأَرۡضِ ذَاتِ ٱلصَّدۡعِ ١٢
तथा फटने वाली धरती की।
तफ़सीर
और धरती की क़सम खाई है, जो फटती है और उससे पौधे, फल और पेड़ निकलते हैं।
وَٱلۡأَرۡضِ ذَاتِ ٱلصَّدۡعِ ١٢
तथा फटने वाली धरती की।
और धरती की क़सम खाई है, जो फटती है और उससे पौधे, फल और पेड़ निकलते हैं।