सूरह Ash-Shu'ara, आयत 63

26:63

فَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡبَحۡرَۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرۡقٖ كَٱلطَّوۡدِ ٱلۡعَظِيمِ ٦٣

तो हमने मूसा की ओर वह़्य की कि अपनी लाठी को सागर पर मारो। (उसने लाठी मारी) तो वह फट गया और हर टुकड़ा बड़े पहाड़ की13 तरह हो गया।

फ़ुटनोट

13 अर्थात बीच से मार्ग बन गया और दोनों ओर पानी पर्वत के समान खड़ा हो गया।

तफ़सीर

हमने यह आदेश देते हुए मूसा की ओर वह़्य की कि अपनी लाठी को सागर पर मारो। अतः उन्होंने उसपर मारा, जिससे सागर फट गया और बनी-इसराईल के गोत्रों की संख्या के बराबर बारह मार्ग बन गए। समुद्र से फटकर अलग हुआ हर टुकड़ा बड़े पहाड़ की तरह इतना बड़ा और दृढ़ था कि उसमें से कुछ भी पानी नहीं बह सकता था।