सूरह Ash-Shu'ara, आयत 201

26:201

لَا يُؤۡمِنُونَ بِهِۦ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ ٢٠١

वे उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।

तफ़सीर

वे अपने कुफ़्र से टस से मस नहीं होंगे और ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।