دُحُورٗاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٞ وَاصِبٌ ٩
भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
तफ़सीर
उन्हें फ़रिश्तों की बात सुनने से भगाने और दूर रखने के लिए। तथा उनके लिए आखिरत में दर्दनाक स्थायी यातना है, जो कभी खत्म नहीं होगी।
دُحُورٗاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٞ وَاصِبٌ ٩
भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
उन्हें फ़रिश्तों की बात सुनने से भगाने और दूर रखने के लिए। तथा उनके लिए आखिरत में दर्दनाक स्थायी यातना है, जो कभी खत्म नहीं होगी।