مَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ ١٥٤
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?
तफ़सीर
(ऐ मुश्रिको!) तुम्हें क्या हो गया है कि यह अन्यायपूर्ण फ़ैसला कर रहे हो, कि अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हो और अपने लिए बेटे?!
مَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ ١٥٤
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?
(ऐ मुश्रिको!) तुम्हें क्या हो गया है कि यह अन्यायपूर्ण फ़ैसला कर रहे हो, कि अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हो और अपने लिए बेटे?!