وَإِذَآ أَذَقۡنَا ٱلنَّاسَ رَحۡمَةٗ فَرِحُواْ بِهَاۖ وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ إِذَا هُمۡ يَقۡنَطُونَ ٣٦
और जब हम लोगों को कोई दया चखाते हैं, तो वे उससे प्रसन्न हो जाते हैं, और अगर उन्हें उनकी करतूतों के कारण कोई विपत्ति पहुँचती है, तो वे सहसा निराश हो जाते हैं।
तफ़सीर
जब हम लोगों को अपनी नेमतों में से कोई नेमत चखाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य और धन, तो वे उसपर इतराने और अभिमान करने लगते हैं। और अगर उनके गुनाहों के कारण, उन्हें कोई बुराई पहुँचती है, जैसे बीमारी और गरीबी आदि, तो वे एकाएक अल्लाह की दया से निराश हो जाते हैं और उन्हें जो बुराई पहुँची है उसके दूर होने से आशाहीन हो जाते हैं।