सूरह Ar-Ra'd, आयत 24

13:24

سَلَٰمٌ عَلَيۡكُم بِمَا صَبَرۡتُمۡۚ فَنِعۡمَ عُقۡبَى ٱلدَّارِ ٢٤

(वे कहेंगे :) सलाम (शांति) हो तुमपर उसके बदले जो तुमने धैर्य किया। तो क्या ही अच्छा है इस घर (आखिरत) का परिणाम!

तफ़सीर

फ़रिश्ते जब भी उनके पास आएँगे, उनका यह कहते हुए अभिवादन करेंगे : तुमपर सलाम (शांति) हो! अर्थात् : तुम अल्लाह के आज्ञापालन और उसके कष्टदायक फैसलों पर धैर्य से काम लेने, और उसकी अवज्ञा से बचने के कारण विपत्तियों से सुरक्षित रहो। तो क्या ही अच्छा है इस घर का परिणाम, जो तुम्हें प्राप्त हुआ है।