يَسۡـَٔلُكَ أَهۡلُ ٱلۡكِتَٰبِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيۡهِمۡ كِتَٰبٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِۚ فَقَدۡ سَأَلُواْ مُوسَىٰٓ أَكۡبَرَ مِن ذَٰلِكَ فَقَالُوٓاْ أَرِنَا ٱللَّهَ جَهۡرَةٗ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ بِظُلۡمِهِمۡۚ ثُمَّ ٱتَّخَذُواْ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُ فَعَفَوۡنَا عَن ذَٰلِكَۚ وَءَاتَيۡنَا مُوسَىٰ سُلۡطَٰنٗا مُّبِينٗا ١٥٣
किताब वाले (ऐ नबी!) आपसे माँग करते हैं कि आप उनपर आकाश से कोई पुस्तक उतार लाएँ। तो वे तो मूसा से इससे भी बड़ी माँग कर चुके हैं। चुनाँचे उन्होंने कहा : हमें अल्लाह को खुल्लम-खुल्ला97 दिखा दो। तो उन्हें बिजली ने उनके अत्याचार के कारण पकड़ लिया। फिर उन्होंने अपने पास खुली निशानियाँ आने के बाद बछड़े को पूज्य बना लिया। तो हमने उसे क्षमा कर दिया और हमने मूसा को स्पष्ट प्रमाण प्रदान किया।
फ़ुटनोट
97 अर्थात आँखों से दिखा दो।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) यहूदी आपसे माँग करते हैं कि जैसे मूसा के साथ हुआ, वैसे ही आप उनके लिए आकाश से एक ही बार में कोई पुस्तक उतार लाएँ, जो आपकी सच्चाई की निशानी हो। तो आप इसे उनकी ओर से कोई बड़ा माँग न समझें। क्योंकि उनके पूर्वजों ने मूसा अलैहिस्सलाम से इससे कहीं बड़ी माँग की थी जो इन लोगों ने आपसे की है। उन्होंने कहा था कि "हमें अल्लाह को आमने-सामने दिखा दो", चुनाँचे उन्हें सज़ा के तौर पर बेहोश कर दिया गया। फिर अल्लाह ने उन्हें पुनर्जीवित किया, तो उन्होंने अल्लाह को छोड़कर बछड़े की पूजा की, हालाँकि उनके पास अल्लाह के एकत्व और उसके एकमात्र रब (पालनहार) और पूज्य होने को दर्शाने वाली स्पष्ट निशानियाँ आ चुकी थीं। फिर हमने उन्हें क्षमा कर दिया, तथा मूसा - अलैहिस्सलाम - को उनकी जाति के विरुद्ध स्पष्ट तर्क प्रदान किया।