सूरह An-Nazi'at, आयत 38

79:38

وَءَاثَرَ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا ٣٨

और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।

तफ़सीर

तथा उसने दुनिया के नश्वर जीवन को आख़िरत के बाकी रहने वाले जीवन पर प्राथमिकता दी।