وَوَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِم بِمَا ظَلَمُواْ فَهُمۡ لَا يَنطِقُونَ ٨٥
और उनपर (यातना की) बात सिद्ध हो जाएगी, उसके बदले जो उन्होंने अत्याचार किया, सो वे बोल न सकेंगे।
तफ़सीर
अल्लाह के इनकार तथा उसकी आयतों को झुठलाकर अत्याचार करने के कारण उनपर यातना आ पहुँचेगी। अतः वे अपने बचाव के संदर्भ में कोई बात नहीं कर सकेंगे, क्योंकि वे ऐसा करने में असमर्थ और उनके तर्क अमान्य होंगे।