सूरह An-Nahl, आयत 59

16:59

يَتَوَٰرَىٰ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ مِن سُوٓءِ مَا بُشِّرَ بِهِۦٓۚ أَيُمۡسِكُهُۥ عَلَىٰ هُونٍ أَمۡ يَدُسُّهُۥ فِي ٱلتُّرَابِۗ أَلَا سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ ٥٩

वह उस बुरी सूचना के कारण लोगों से छिपता फिरता है, जो उसे दी गई है। (सोचता है कि) क्या22 उसे अपमान के साथ रहने दे, अथवा उसे मिट्टी में गाड़ दे? देखो! बहुत बुरा है, जो वे निर्णय करते हैं।

फ़ुटनोट

22 अर्थात जीवित रहने दे। इस्लाम से पूर्व अरब समाज के कुछ क़बीलों में पुत्रियों के जन्म को लज्जा की चीज़ समझा जाता था। जिसका चित्रण इस आयत में किया गया है।

तफ़सीर

बेटी पैदा होने की सूचना उसे इतनी बुरी लगती है कि लोगों से छिपता फिरता है। वह दिल ही दिल में सोचता है कि क्या इस नवजात को अपमान और दीनता के साथ अपने पास रखे या उसे ज़िंदा धरती में गाड़ दे? कितना बुरा निर्णय है, जो बहुदेववादी करते हैं कि अपने पालनहार के लिए वह कुछ ठहराते हैं, जिसे अपने लिए नापसंद करते हैं।