حُرِّمَتۡ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةُ وَٱلدَّمُ وَلَحۡمُ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيۡرِ ٱللَّهِ بِهِۦ وَٱلۡمُنۡخَنِقَةُ وَٱلۡمَوۡقُوذَةُ وَٱلۡمُتَرَدِّيَةُ وَٱلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ ٱلسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيۡتُمۡ وَمَا ذُبِحَ عَلَى ٱلنُّصُبِ وَأَن تَسۡتَقۡسِمُواْ بِٱلۡأَزۡلَٰمِۚ ذَٰلِكُمۡ فِسۡقٌۗ ٱلۡيَوۡمَ يَئِسَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن دِينِكُمۡ فَلَا تَخۡشَوۡهُمۡ وَٱخۡشَوۡنِۚ ٱلۡيَوۡمَ أَكۡمَلۡتُ لَكُمۡ دِينَكُمۡ وَأَتۡمَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ نِعۡمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ ٱلۡإِسۡلَٰمَ دِينٗاۚ فَمَنِ ٱضۡطُرَّ فِي مَخۡمَصَةٍ غَيۡرَ مُتَجَانِفٖ لِّإِثۡمٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٣
तुमपर ह़राम किया गया है मुर्दार,5 (बहता हुआ) रक्त, सूअर का माँस और वह जिसपर (ज़बह करते समय) अल्लाह के अलावा का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने वाला जानवर, और जिसे चोट लगी हो, तथा गिरने वाला और जिसे सींग लगा हो और जिसे दरिंदे ने खाया हो, परंतु जो तुम (इनमें से) ज़बह6 कर लो। और जो थानों पर ज़बह किया गया हो और यह कि तुम तीरों के साथ भाग्य मालूम करो। यह सब (अल्लाह की) अवज्ञा है। आज वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, तुम्हारे धर्म से निराश7 हो गए। तो तुम उनसे न डरो, केवल मुझसे डरो। आज8 मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के तौर पर पसंद कर लिया। फिर जो व्यक्ति भूख की किसी सूरत में मजूबर कर दिया जाए, इस हाल में कि किसी पाप की ओर झुकाव रखने वाला न हो, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
फ़ुटनोट
5 मुर्दार से अभिप्राय वह पशु है, जिसे धर्म के नियमानुसार ज़बह न किया गया हो।
6 अर्थात जीवित मिल जाए और उसे नियमानुसार ज़बह कर दो।
7 अर्थात इससे कि तुम फिर से मूर्तियों के पुजारी हो जाओगे।
8 सूरतुल-बक़रा आयत संख्या : 28 में कहा गया है कि इबराहीम अलैहिस्सलाम ने यह प्रार्थना की थी कि "इन में से एक आज्ञाकारी समुदाय बना दे"। फिर आयत : 150 में अल्लाह ने कहा कि "अल्लाह चाहता है कि तुमपर अपना पुरस्कार पूरा कर दे।" और यहाँ कहा कि आज अपना पुरस्कार पूरा कर दिया। यह आयत ह़ज्जतुल वदाअ में अरफ़ा के दिन अरफ़ात में उतरी। (सह़ीह बुखारी : 4606) जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अंतिम ह़ज्ज था, जिसके लग-भग तीन महीने बाद आप संसार से चले गए।
तफ़सीर
अल्लाह ने तुमपर वह जानवर हराम किया है, जो शरई तरीक़े से ज़बह किए बिना मर गया हो। तथा उसने तुमपर हराम किया है बहता हुआ रक्त, सूअर का माँस, वह जानवर जिसपर ज़बह करते समय अल्लाह के नाम के अलावा किसी और का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने से मरा हुआ, चोट लगने से मरा हुआ, ऊँचे स्थान से गिरकर मरा हुआ, या दूसरे जानवर के सींग मारने के कारण मरा हुआ, तथा वह जानवर जिसे शेर, चीते और भेड़िये जैसे किसी हिंसक पशु (दरिंदे) ने फाड़ खाया हो। परंतु उक्त जानवरों में से जो तुम्हें जीवित मिले और तुम उसे ज़बह कर लो, तो वह तुम्हारे लिए हलाल है। तथा उसने तुमपर वह जानवर भी हराम किया है जो मूर्तियों के लिए ज़बह किया गया हो। तथा उसने तुमपर तीरों के द्वारा अपना भाग्य मालूम करना भी हराम किया है। ये दरअसल पत्थर या तीर होते थे, जिनमें (करो) या (मत करो) लिखा होता था, चुनाँचे भाग्य मालूम करने वाला उसी के अनुसार कार्य करता था, जो उसके लिए उससे निकलता था। उल्लिखित वर्जनाओं को करना अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर निकलना है। आज काफ़िर लोग इस्लाम धर्म की शक्ति को देखकर, तुम्हारे इस्लाम धर्म को त्याग देने से निराश हो गए। इसलिए उनसे मत डरो, अकेले मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म इस्लाम को परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के रूप में चुन लिया। इसलिए मैं उसके सिवा कोई और धर्म स्वीकार नहीं करुँगा। अतः जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण मरे हुए जानवर का माँस खाने पर मजबूर कर दिया जाए जबकि उसका झुकाव पाप की ओर न हो, तो उसपर इसमें कोई पाप नहीं। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।