قَالَ ٱلَّذِينَ حَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلُ رَبَّنَا هَٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَغۡوَيۡنَآ أَغۡوَيۡنَٰهُمۡ كَمَا غَوَيۡنَاۖ تَبَرَّأۡنَآ إِلَيۡكَۖ مَا كَانُوٓاْ إِيَّانَا يَعۡبُدُونَ ٦٣
वे लोग कहेंगे जिनपर बात23 सिद्ध हो चुकी : ऐ हमारे पालनहार! ये वे लोग हैं जिन्हें हमने गुमराह किया, हमने उन्हें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम गुमराह हुए। हम तेरे सामने (इनसे) अलग होने की घोषणा करते हैं। ये हमारी24 तो पूजा नहीं करते थे।
फ़ुटनोट
23 अर्थात दंड और यातना के अधिकारी होने की।
24 ये हमारे नहीं बल्कि अपने मन के पुजारी थे।
तफ़सीर
कुफ़्र की ओर बुलाने वाले वे लोग जिन पर हमारी यातना सिद्ध हो चुकी, कहेंगे : ऐ हमारे रब! ये हैं वे लोग जिन्हें हमने गुमराह किया, हमने उन्हें उसी तरह गुमराह किया जैसे हम गुमराह हुए। हम तेरे समक्ष इनसे अलग होने की घोषणा करते हैं। ये हमारी पूजा नहीं करते थे। बल्कि ये लोग शैतान की पूजा करते थे।