قَدۡ كَانَتۡ لَكُمۡ أُسۡوَةٌ حَسَنَةٞ فِيٓ إِبۡرَٰهِيمَ وَٱلَّذِينَ مَعَهُۥٓ إِذۡ قَالُواْ لِقَوۡمِهِمۡ إِنَّا بُرَءَٰٓؤُاْ مِنكُمۡ وَمِمَّا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ كَفَرۡنَا بِكُمۡ وَبَدَا بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمُ ٱلۡعَدَٰوَةُ وَٱلۡبَغۡضَآءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤۡمِنُواْ بِٱللَّهِ وَحۡدَهُۥٓ إِلَّا قَوۡلَ إِبۡرَٰهِيمَ لِأَبِيهِ لَأَسۡتَغۡفِرَنَّ لَكَ وَمَآ أَمۡلِكُ لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖۖ رَّبَّنَا عَلَيۡكَ تَوَكَّلۡنَا وَإِلَيۡكَ أَنَبۡنَا وَإِلَيۡكَ ٱلۡمَصِيرُ ٤
निश्चय तुम्हारे लिए इबराहीम तथा उनके साथियों में एक अच्छा आदर्श है। जब उन्होंने अपनी जाति से कहा : निःसंदेह हम तुमसे और उन सभी चीज़ों से बरी हैं, जिन्हें तुम अल्लाह के अतिरिक्त पूजते हो। हम तुम्हें नहीं मानते और हमारे बीच तथा तुम्हारे बीच दुश्मनी और घृणा सदा के लिए प्रकट हो चुकी है, यहाँ तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ। परंतु इबराहीम का अपने पिता से यह कहना (तुम्हारे लिए आदर्श नहीं) कि मैं अवश्य तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करूँगा2 और मैं अल्लाह के सामने तुम्हारे लिए कुछ अधिकार नहीं रखता। ऐ हमारे पालनहार! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही ओर लौटे और तेरी ही ओर लौटकर आना है।
फ़ुटनोट
2 इबराहीम (अलैहिस्सलाम) ने जो प्रार्थनाएँ अपने पिता के लिए कीं उनके लिए देखिए : सूरत इबराहीम, आयत : 41, तथा सूरतुश्-शुअरा, आयत : 86। फिर जब आदरणीय इबराहीम (अलैहिस्सलाम) को यह ज्ञान हो गया कि उन का पिता अल्लाह का शत्रु है तो आप उससे विरक्त हो गए। (देखिए : सूरतुत-तौबा, आयत : 114)
तफ़सीर
तुम्हारे लिए (ऐ मोमिनो!) इबराहीम अलैहिस्सलाम और उन मोमिनों में जो उनके साथ थे, एक अच्छा आदर्श है, जब उन्होंने अपनी काफ़िर जाति से कहा : हम तुमसे तथा उन मूर्तियों से बरी हैं, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो। हम उस धर्म को नहीं मानते, जिसपर तुम चल रहे हो, तथा हमारे और तुम्हारे बीच हमेशा के लिए शत्रुता और घृणा प्रकट हो चुकी है, यहाँ तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान ले आओ और किसी को उसका साझी न बनाओ। अतः तुम्हें भी चाहिए कि उनकी तरह अपनी काफ़िर जाति से बरी होने का ऐलान कर दो। परंतु इबराहीम अलैहिस्सलाम की इस बात को छोड़कर, जो उन्होंने अपने पिता से कही थी कि : मैं अवश्य अल्लाह से तुम्हारे लिए क्षमा याचना करूँगा। तो तुम इसमें उनका पालन न करो। क्योंकि यह बात उन्होंने अपने पिता से निराश होने से पहले कही थी। अतः किसी मोमिन के लिए जायज़ नहीं है कि वह किसी मुश्रिक के लिए क्षमा माँगे। और मैं तुम्हारा अल्लाह की यातना से कुछ भी बचाव नहीं कर सकता। ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने सभी मामलों में केवल तुझी पर भरोसा किया है, और हम तेरी ही ओर तौबा करते हुए लौटे हैं, और तेरी ही ओर क़ियामत के दिन सबको लौटकर आना है।