सूरह Al-Ma'idah, आयत 94

5:94

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَيَبۡلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَيۡءٖ مِّنَ ٱلصَّيۡدِ تَنَالُهُۥٓ أَيۡدِيكُمۡ وَرِمَاحُكُمۡ لِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٩٤

ऐ ईमान वालो! निश्चय अल्लाह शिकार में से किसी चीज़ के साथ तुम्हारी अवश्य परीक्षा लेगा, जिसपर तुम्हारे हाथ तथा भाले पहुँचते होंगे, ताकि अल्लाह जान ले कि कौन उससे बिन देखे डरता है। फिर जो उसके पश्चात सीमा से बढ़े, तो उसके लिए दर्दनाक यातना है।

तफ़सीर

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तुम्हारी इस तरह परीक्षा लेगा कि वह जंगली शिकार में से कुछ तुम्हारे पास ले आएगा, जबकि तुम एहराम की अवस्था में होगे। उनमें से छोटे शिकार को तुम अपने हाथों से पकड़ोगे और बड़े शिकार को अपने भालों से, ताकि अल्लाह जान ले (प्रत्यक्ष रूप से जानना जिसपर बंदों की पकड़ होती है) कि कौन अल्लाह के ज्ञान पर पूर्ण ईमान रखने की वजह से उससे बिन देखे डरता है। इसलिए वह अपने उस स्रष्टा के डर से शिकार करने से रुक जाता है, जिससे उसका कार्य छिपा नहीं रहता है। अतः जो हद से आगे बढ़े और ह़ज्ज या उम्रा के एहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है; क्योंकि उसने वह कार्य किया है जिससे अल्लाह ने मना किया था।