وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَكَفَّرۡنَا عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَأَدۡخَلۡنَٰهُمۡ جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٦٥
और यदि वास्तव में अह्ले किताब ईमान ले आते तथा (अल्लाह से) डरते, तो हम अवश्य उनकी बुराइयाँ उनसे दूर कर देते और उन्हें अवश्य नेमतों वाली जन्नतों में दाखिल करते।
तफ़सीर
यदि यहूदी और ईसाई मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा लाई हुई शरीयत पर ईमान ले आते तथा पापों से बचकर अल्लाह से डरते, तो हम अवश्य उनके द्वारा किए गए पापों को उनसे दूर कर देते, भले ही वे बहुत थे। तथा हम अवश्य उन्हें क़ियामत के दिन नेमतों वाली जन्नतों में दाख़िल करते, जिसमें वे निर्बाध नेमतों का आनंद लेते।