وَلَمۡ تَكُن لَّهُۥ فِئَةٞ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا ٤٣
और नहीं था उसके पास कोई जत्था, जो अल्लाह के मुक़ाबले में उसकी मदद करता और न वह अपनी सहायता आप कर सका।
तफ़सीर
इस काफ़िर के पास उसे उसपर उतरने वाले दंड से बचाने के लिए कोई समूह नहीं था, जबकि वह अपने समूह पर गर्व कर रहा था। और वह स्वयं भी अल्लाह के उसके बाग़ को विनष्ट करने से बचने वाला न था।