وَٱخۡتِلَٰفِ ٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ وَمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن رِّزۡقٖ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَا وَتَصۡرِيفِ ٱلرِّيَٰحِ ءَايَٰتٞ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ ٥
तथा रात और दिन के फेर-बदल में और उस रोज़ी में जो अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को उसके मरने के पश्चात् जीवित कर दिया, तथा हवाओं के फेरने में, उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते हैं।
तफ़सीर
तथा रात और दिन के आने-जाने में, और उस बारिश (पानी) में जो अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को, उसमें पेड़-पौधे उगाकर, पुनर्जीवित कर दिया, जबकि वह मृत हो चुकी थी उसमें एक पौधा भी नहीं था। तथा हवाओं के फेरने में; तुम्हारे लाभ के लिए उन्हें कभी एक दिशा से लाकर, तो कभी दूसरी दिशा से चलाकर; इन सभी चीज़ों में ऐसे लोगों के लिए निशानियाँ हैं, जो बुद्धि से काम लेते हैं। चुनाँचे वे उनसे यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अल्लाह एक है, मरणोपरांत पुनर्जीवित करने में सक्षम है और हर चीज़ पर शक्ति रखता है।