सूरह Al-Jathiyah, आयत 4

45:4

وَفِي خَلۡقِكُمۡ وَمَا يَبُثُّ مِن دَآبَّةٍ ءَايَٰتٞ لِّقَوۡمٖ يُوقِنُونَ ٤

तथा तुम्हारी सृष्टि में और उन जीवित चीज़ों में जो वह फैलाता2 है, उन लोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं जो विश्वास करते हैं।

फ़ुटनोट

2 तौह़ीद (एकेश्वरवाद) के प्रकरण में क़ुरआन ने प्रत्येक स्थान पर आकाश तथा धरती में अल्लाह के सामर्थ्य की फैली हुई निशानियों को प्रस्तुत किया है। और यह बताया है कि जैसे उसने वर्षा द्वारा मनुष्य के आर्थिक जीवन की व्यवस्था कर दी है, वैसे ही रसूलों तथा पुस्तकों द्वारा उसके आत्मिक जीवन की व्यवस्था कर दी है जिसपर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यह विश्व की व्यवस्था स्वयं ऐसी खुली पुस्तक है जिसके पश्चात् ईमान लाने के लिए किसी और प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

तफ़सीर

और (ऐ लोगों!) तुम्हें वीर्य से, फिर जमे हुए रक्त से, फिर मांस के टुकड़े से पैदा करने में, तथा धरती पर चलने वाले अल्लाह के फैलाए हुए जानवरों की रचना में, उन लोगों के लिए अल्लाह की एकता (एकेश्वरवाद) की बहुत-सी निशानियाँ हैं, जो इस बात पर विश्वास करते हैं कि अल्लाह ही सृष्टिकर्ता है।