सूरह Al-Jathiyah, आयत 1

45:1

حمٓ ١

ह़ा, मीम।

तफ़सीर

{हा, मीम।} सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।