सूरह Al-Isra, आयत 51

17:51

أَوۡ خَلۡقٗا مِّمَّا يَكۡبُرُ فِي صُدُورِكُمۡۚ فَسَيَقُولُونَ مَن يُعِيدُنَاۖ قُلِ ٱلَّذِي فَطَرَكُمۡ أَوَّلَ مَرَّةٖۚ فَسَيُنۡغِضُونَ إِلَيۡكَ رُءُوسَهُمۡ وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هُوَۖ قُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ قَرِيبٗا ٥١

या कोई और रचना (बन जाओ), जो तुम्हारे दिलों में इससे बड़ी मालूम होती हो। फिर वे पूछेंगे : कौन हमें दोबारा पैदा करेगा? आप कह दें : वही जिसने तुम्हें पहली बार पैदा किया। फिर वे आपके आगे अपना सिर हिलाएँगे29 और कहेंगे : ऐसा कब होगा? आप कह दें : हो सकता है कि वह निकट हो।

फ़ुटनोट

29 अर्थात परिहास करते हुए आश्चर्य से सिर हिलाएँगे।

तफ़सीर

या उन दोनों से बड़ी कोई और रचना हो जाओ, जो तुम्हारे दिलों में बड़ी मालूम होती हो। फिर भी अल्लाह तुम्हें लौटाएगा, जैसे पहली बार किया था और तुम्हें पुनर्जीवित करेगा, जैसे तुम्हें पहली बार पैदा किया था। इसपर ये हठधर्मी लोग कहेंगे : हमारी मृत्यु के बाद कौन हमें दोबारा जीवित करेगा? आप उनसे कह दें : वही तुम्हें दोबारा लौटाएगा जिसने तुम्हें पहली बार पूर्व उदाहरण के बिना पैदा किया था। फिर वे आपके उत्तर का मज़ाक़ उड़ाते हुए अपने सिर हिलाएँगे और उसे असंभव समझते हुए कहेंगे : यह लौटाना कब होगा? आप उनसे कह दें : शायद यह निकट है। क्योंकि जो भी आने वाला है, वह निकट ही है।