كَلَّا بَلۡ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ ٩
हरगिज़ नहीं, बल्कि तुम बदले (के दिन) को झुठलाते हो।
तफ़सीर
(ऐ धोखे में पड़े हुए लोगो) मामला ऐसा नहीं है, जैसा तुमने समझ रखा है। बल्कि सच्चाई यह है कि तुम बदले के दिन को झुठलाते हो, इसलिए उसके लिए तैयारी नहीं करते हो।