يَٰمَرۡيَمُ ٱقۡنُتِي لِرَبِّكِ وَٱسۡجُدِي وَٱرۡكَعِي مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ ٤٣
ऐ मरयम! अपने पालनहार का आज्ञापालन करती रहो और सजदा करो तथा रुकू करने वालों के साथ रुकू करती रहो।
तफ़सीर
ऐ मरयम! नमाज़ में लंबे समय तक खड़ी रहो, अपने पालनहार को सजदा करो और उसके रुकू करने वाले नेक बंदों के साथ रुकू करो।