सूरह Al-Imran, आयत 181

3:181

لَّقَدۡ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوۡلَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ فَقِيرٞ وَنَحۡنُ أَغۡنِيَآءُۘ سَنَكۡتُبُ مَا قَالُواْ وَقَتۡلَهُمُ ٱلۡأَنۢبِيَآءَ بِغَيۡرِ حَقّٖ وَنَقُولُ ذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ ١٨١

निःसंदेह अल्लाह ने उन लोगों की बात सुन ली है, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह निर्धन है और हम धनवान106 हैं!" उन्होंने जो कुछ कहा है, हम उसे लिख लेंगे और उनके नबियों को अनाधिकार क़त्ल करने को भी। तथा हम (उनसे) कहेंगे कि (अब तुम) जलाने वाली यातना का मज़ा चखो।

फ़ुटनोट

106 यह बात यहूदियों ने कही थी। (देखिए : सूरतुल बक़रा, आयत : 254)

तफ़सीर

अल्लाह ने यहूदियों के कथन को सुना जब उन्होंने कहा : “अल्लाह गरीब है क्योंकि उसने हमसे ऋण मांगा है, और हमारे पास जो धन है उससे हम समृद्ध हैं।” उन्होंने अपने पालनहार पर जो मिथ्यारोपण किया है, हम उसे तथा उनके अनाधिकार अपने नबियों की हत्या करने को भी अवश्य लिख लेंगे। और हम उनसे कहेंगे : लो, आग में जला देने वाली यातना का मज़ा चखो।