إِذۡ هَمَّت طَّآئِفَتَانِ مِنكُمۡ أَن تَفۡشَلَا وَٱللَّهُ وَلِيُّهُمَاۗ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ١٢٢
तथा (याद करो) जब तुम्हारे दो समूहों67 ने साहसहीनता दिखाने (पीछे हटने) का इरादा किया और अल्लाह उनका समर्थक व सहायक था, तथा ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।
फ़ुटनोट
67 अर्थात दो क़बीले बनू सलमा तथा बनू हारिसा ने भी अब्दुल्लाह बिन उबय्य के साथ वापस हो जाना चाहा। (सह़ीह़ बुख़ारी ह़दीस : 4558)
तफ़सीर
(ऐ नबी) याद कीजिए जो कुछ विश्वासियों के दो समूहों बनू सलिमा और बनू हारिसा के साथ घटित हुआ, जिस समय वे साहसहीन हो गए और मुनाफिक़ों (पाखंडियों) के वापस आने पर वापसी का इरादा कर लिया, हालाँकि अल्लाह उन्हें लड़ाई पर सुदृढ़ रखकर तथा उन्हें उनके उस इरादे से फेरकर उनकी सहायता करने वाला है। और मोमिनों को अपनी सभी स्थितियों में अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।