۞ لَيۡسُواْ سَوَآءٗۗ مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ أُمَّةٞ قَآئِمَةٞ يَتۡلُونَ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ ءَانَآءَ ٱلَّيۡلِ وَهُمۡ يَسۡجُدُونَ ١١٣
वे सभी समान नहीं हैं; किताब वालों में एक समूह (सत्य पर) स्थापित62 है, जो रात की घड़ियों में अल्लाह की आयतें पढ़ते हैं और वे सजदे करते हैं।
फ़ुटनोट
62 अर्थात जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाए। जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) आदि।
तफ़सीर
किताब वाले अपनी स्थिति में समान नहीं हैं। बल्कि उनमें से एक समूह अल्लाह के धर्म पर सुदृढ़ है और अल्लाह के आदेश व निषेध का पालन करता हैं। वे रात की घड़ियों में अल्लाह की आयतों का पाठ करते हैं जबकि वे अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ रहे होते हैं। यह समूह पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी बनाए जाने से पहले था और उनमें से जिसे नुबुव्वत का समय काल मिला, उसने इस्लाम ग्रहण कर लिया।