सूरह Al-Hijr, आयत 50

15:50

وَأَنَّ عَذَابِي هُوَ ٱلۡعَذَابُ ٱلۡأَلِيمُ ٥٠

और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।

तफ़सीर

और उन्हें बता दें कि मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है। इसलिए वे मुझ से तौबा करें, ताकि मेरी क्षमा के भागीदार बन सकें और मेरी यातना से बच सकें।