सूरह Al-Hajj, आयत 54

22:54

وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤۡمِنُواْ بِهِۦ فَتُخۡبِتَ لَهُۥ قُلُوبُهُمۡۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٥٤

और ताकि उन लोगों को जिन्हें ज्ञान दिया गया है, विश्वास हो जाए कि वही आपके पालनहार की ओर से सत्य है। तो वे उसपर ईमान ले आएँ और उनके दिल उसके लिए झुक जाएँ। और निःसंदेह अल्लाह ईमान लाने वालों को निश्चय सीधा मार्ग दिखाने वाला है।

तफ़सीर

और ताकि जिन लोगों को अल्लाह ने ज्ञान दिया है, वे निश्चित हो जाएँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला क़ुरआन ही वह सत्य है, जिसकी अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है। इस प्रकार उनका उसपर ईमान बढ़ जाए और उनके हृदय उसके अधीन हो जाएँ और उसके सामने झुक जाएँ। निःसंदेह अल्लाह अपने ऊपर ईमान रखने वालों को, उनके उसके आगे झुकने के प्रतिफल के तौर पर, सत्य का सीधा मार्ग दिखाने वाला है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।