وَلِكُلِّ أُمَّةٖ جَعَلۡنَا مَنسَكٗا لِّيَذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّنۢ بَهِيمَةِ ٱلۡأَنۡعَٰمِۗ فَإِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ فَلَهُۥٓ أَسۡلِمُواْۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُخۡبِتِينَ ٣٤
तथा प्रत्येक समुदाय के लिए हमने एक क़ुर्बानी निर्धारित की है, ताकि वे उन पालतू चौपायों पर अल्लाह का नाम लें, जो उसने उन्हें प्रदान किए हैं। अतः तुम्हारा पूज्य एक पूज्य है, तो उसी के आज्ञाकारी हो जाओ। और (ऐ नबी!) आप विनम्रता अपनाने वालों को शुभ सूचना सुना दें।
तफ़सीर
और हमने गुज़रे हुए हर समुदाय के लिए अल्लाह को अर्पण के रूप में खून बहाने के लिए एक अनुष्ठान निर्धारित किया है, इस आशा में कि वे उन बलिदानों को ज़बह करते समय इस बात पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसका नाम लें कि उसने उन्हें ऊँट, गाय और भेड़-बकरी आदि चौपाए प्रदान किए। तो (ऐ लोगो!) तुम्हारा पूज्य एक ही पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। इसलिए अकेले उसी के अधीन रहो और उसके आदेशानुसार चलो। और (ऐ रसूल!) अपने रब के आगे झुकने वालों और केवल उसी की पूजा करने वालों को उस चीज़ की सूचना दे दें, जो उन्हें खुश करने वाली है।