सूरह Al-Hajj, आयत 32

22:32

ذَٰلِكَۖ وَمَن يُعَظِّمۡ شَعَٰٓئِرَ ٱللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقۡوَى ٱلۡقُلُوبِ ٣٢

यह (अल्लाह का आदेश है), और जो अल्लाह के प्रतीकों23 का सम्मान करता है, तो निश्चय यह दिलों के तक़वा की बात है।

फ़ुटनोट

23 अर्थात उपासना के लिए उसके निश्चित किए हुए प्रतीकों का।

तफ़सीर

यह वे काम हैं, जिनका अल्लाह ने आदेश दिया है, जैसे अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानना, खालिस उसी की पूजा करना और बुतों तथा झूठी बात से बचना। और जो अल्लाह के धर्म के प्रतीकों (जैसे क़ुर्बानी के जानवर और हज्ज के अनुष्ठानों आदि) का सम्मान करता है, तो उनका सम्मान इस बात का प्रमाण है कि दिलों में अल्लाह का तक़वा (भय) है।