وَمَآ أَرۡسَلۡنَا قَبۡلَكَ مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ إِلَّآ إِنَّهُمۡ لَيَأۡكُلُونَ ٱلطَّعَامَ وَيَمۡشُونَ فِي ٱلۡأَسۡوَاقِۗ وَجَعَلۡنَا بَعۡضَكُمۡ لِبَعۡضٖ فِتۡنَةً أَتَصۡبِرُونَۗ وَكَانَ رَبُّكَ بَصِيرٗا ٢٠
और हमने आपसे पहले कोई रसूल नहीं भेजे, परंतु निश्चय वे खाना खाते थे और बाज़ारों में चलते-फिरते10 थे। तथा हमने तुममें से एक को दूसरे के लिए एक परीक्षण बनाया है। क्या तुम धैर्य रखोगे? तथा आपका पालनहार हमेशा से सब कुछ देखने11 वाला है।
फ़ुटनोट
10 अर्थात वे मानव पुरुष थे।
11 आयत का भावार्थ यह है कि अल्लाह चाहता, तो पूरा संसार रसूलों का साथ देता। परंतु वह लोगों की रसूलों द्वारा तथा रसूलों की लोगों द्वारा परीक्षा लेना चाहता है कि लोग ईमान लाते हैं या नहीं और रसूल धैर्य रखते हैं या नहीं।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले जितने भी रसूल भेजे, वे सभी इनसान थे, जो खाना खाते थे और बाज़ारों में चलते-फिरते थे। अतः इस मामले में आप कोई अनूठे नबी नहीं हैं। तथा (ऐ लोगो!) हमने तुम्हें खुशहाली एवं ग़रीबी तथा स्वास्थ्य एवं बीमारी आदि अलग-अलग अवस्थाओं में रखकर, एक-दूसरे के लिए परीक्षण बनाया है। क्या तुम अपने इस परीक्षण में धैर्य से काम लोगे, कि अल्लाह तुम्हें तुम्हारे धैर्य का प्रतिफल प्रदान करे?! और तुम्हारा रब देख रहा है कि कौन सब्र करता है और कौन सब्र नहीं करता, तथा कौन उसका आज्ञापालन करता है और कौन उसकी अवज्ञा करता है।