सूरह Al-Furqan, आयत 14

25:14

لَّا تَدۡعُواْ ٱلۡيَوۡمَ ثُبُورٗا وَٰحِدٗا وَٱدۡعُواْ ثُبُورٗا كَثِيرٗا ١٤

(उनसे कहा जाएगा :) आज एक विनाश को मत पुकारो, बल्कि बहुत-से विनाशों को पुकारो।6

फ़ुटनोट

6 अर्थात आज तुम्हारे लिए विनाश ही विनाश है।

तफ़सीर

(ऐ काफ़िरो!) आज एक विनाश को मत पुकारो, बल्कि बहुत अधिक विनाशों को पुकारो। लेकिन तुम्हारी फ़रियाद सुनी नहीं जाएगी, बल्कि तुम दर्दनाक यातना में हमेशा पड़े रहोगे।