سَيَقُولُ لَكَ ٱلۡمُخَلَّفُونَ مِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ شَغَلَتۡنَآ أَمۡوَٰلُنَا وَأَهۡلُونَا فَٱسۡتَغۡفِرۡ لَنَاۚ يَقُولُونَ بِأَلۡسِنَتِهِم مَّا لَيۡسَ فِي قُلُوبِهِمۡۚ قُلۡ فَمَن يَمۡلِكُ لَكُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيۡـًٔا إِنۡ أَرَادَ بِكُمۡ ضَرًّا أَوۡ أَرَادَ بِكُمۡ نَفۡعَۢاۚ بَلۡ كَانَ ٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرَۢا ١١
शीघ्र ही देहातियों में से पीछे छोड़ दिए जाने वाले5 लोग आपसे कहेंगे : हमारे धन और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त रखा। अतः आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना करें। वे अपनी ज़बानों से वह बात कहते हैं, जो उनके दिलों में नहीं है। आप कह दीजिए कि कौन है, जो अल्लाह के मुकाबले में तुम्हारे लिए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचाना चाहे या तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह हमेशा से उसकी खबर रखता है।
फ़ुटनोट
5 आयत 11-12 में मदीना के आस-पास के मुनाफ़िक़ों की दशा बताई गई है, जो नबी के साथ उमरा के लिए मक्का नहीं गए। उन्होंने इस डर से कि मुसलमान सब के सब मार दिए जाएँगे, आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का साथ नही दिया।
तफ़सीर
जब (ऐ रसूल!) आप उन देहातियों को डाँट-डपट करेंगे, जिन्हें अल्लाह ने आपके साथ मक्का की यात्रा पर जाने से पीछे छोड़ दिया था, तो वे आपसे कहेंगे : हमें हमारे धन की देखरेख और हमारे बाल-बच्चों की देखभाल ने आपके साथ चलने से रोक दिया। अतः अल्लाह से हमारे पापों के लिए क्षमा की प्रार्थना करें। वे अपनी ज़बानों से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उनके लिए क्षमा याचना करने का अनुरोध करते हैं, जो कि उनके दिलों में नहीं है; क्योंकि उन्होंने अपने पापों से तौबा नहीं की है। आप उनसे कह दें : यदि अल्लाह तुम्हें भलाई पहुँचाना चाहे या तुम्हारे साथ बुराई का निश्चय कर ले, तो कोई अल्लाह के मुकाबले में तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकता। बल्कि अल्लाह हमेशा तुम्हारे हर कार्य से अवगत है। तुम्हारा कोई काम, चाहे तुम उसे जितना भी छिपाओ, अल्लाह से छिपा नहीं है।