إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلۡمِرۡصَادِ ١٤
निःसंदेह तेरा पालनहार निश्चय घात में है।2
फ़ुटनोट
2 (6-14) इन आयतों में उन जातियों की चर्चा की गई है, जिन्होंने माया मोह में पड़कर परलोक और प्रतिफल का इनकार किया, और अपने नैतिक पतन के कारण धरती में उग्रवाद किया। "आद, इरम" से अभिप्रेत वह पुरानी जाति है जिसे क़ुरआन तथा अरब में "आदे ऊला" (प्रथम आद) कहा गया है। यह वह प्राचीन जाति है जिसके पास हूद (अलैहिस्सलाम) को भेजा गया। और इनको "आदे इरम" इस लिए कहा गया है कि यह शामी वंशक्रम की उस शाखा से संबंधित थे जो इरम बिन शाम बिन नूह़ से चली आती थी। आयत संख्या 11 में इसका संकेत है कि उग्रवाद का उद्गम भौतिकवाद एवं सत्य विश्वास का इनकार है, जिसे वर्तमान युग में भी प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) निश्चय आपका पालनहार लोगों के कर्मों को देख रहा है और उनका निरीक्षण कर रहा है, ताकि अच्छा कार्य करने वाले को जन्नत के साथ और बुरा कार्य करने वाले को जहन्नम के साथ पुरस्कृत करे।