۞ وَإِذِ ٱسۡتَسۡقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ فَقُلۡنَا ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡحَجَرَۖ فَٱنفَجَرَتۡ مِنۡهُ ٱثۡنَتَا عَشۡرَةَ عَيۡنٗاۖ قَدۡ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشۡرَبَهُمۡۖ كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ مِن رِّزۡقِ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ ٦٠
तथा (वह समय याद करो) जब मूसा ने अपनी जाति के लिए पानी माँगा, तो हमने कहा : अपनी लाठी पत्थर पर मारो। तो उससे बारह31 सोते फूट निकले। निःसंदेह सब लोगों ने अपने पीने के स्थान को जान लिया। अल्लाह के दिए हुए में से खाओ और पियो और धरती में बिगाड़ फैलाते न फिरो।
फ़ुटनोट
31 इसराईली वंश के बारह क़बीले थे। अल्लाह ने प्रत्येक क़बीले के लिए अलग-अलग सोते निकाल दिए, ताकि उनके बीच पानी के लिए झगड़ा न हो। (देखिए : तफ़्सीर क़ुर्तुबी)।
तफ़सीर
तथा अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को भी याद करो जब तुम चटियल मैदान में भटक रहे थे और तुम बहुत प्यासे थे, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने रब से प्रार्थना की और उससे तुम्हारे लिए पानी माँगा। इसलिए हमने उन्हें अपनी लाठी पत्थर पर मारने का आदेश दिया। जब उन्होंने उसको मारा, तो उससे तुम्हारे गोत्रों की संख्या के अनुसार बारह सोते फूट पड़े और उनमें से पानी निकल आया। हमने हर गोत्र के लिए उसके पीने का विशिष्ट स्थान स्पष्ट कर दिया, ताकि उनके बीच कोई विवाद न हो, और हमने तुमसे कहा : अल्लाह की उस रोज़ी से खाओ और पियो, जो उसने तुम्हें बिना किसी परिश्रम या कार्य के प्रदान की है और धरती पर बिगाड़ फैलाते न फिरो।