وَٱسۡتَعِينُواْ بِٱلصَّبۡرِ وَٱلصَّلَوٰةِۚ وَإِنَّهَا لَكَبِيرَةٌ إِلَّا عَلَى ٱلۡخَٰشِعِينَ ٤٥
तथा सब्र और नमाज़ से मदद माँगो और निःसंदेह वह (नमाज़) निश्चय बहुत भारी है, परंतु अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण करने वालों पर (नहीं)।24
फ़ुटनोट
24 भावार्थ यह है कि धैर्य तथा नमाज़ से अल्लाह की आज्ञा के अनुपालन तथा सदाचार की भावना उत्पन्न होती है।
तफ़सीर
अपने सभी धार्मिक और सांसारिक मामलों में सब्र (धैर्य) के साथ मदद माँगो तथा नमाज़ के साथ जो तुम्हें अल्लाह के क़रीब लाती है और तुम्हें उससे जोड़ती है। अतः वह तुम्हारी मदद करता है और तुम्हारी रक्षा करता है और तुम्हारे नुक़सान को दूर कर देता है। और निश्चय नमाज़ क़ायम करना बहुत कठिन और भारी है, सिवाय उनके जो अपने पालनहार के प्रति समर्पित होने वाले हैं।