وَلِكُلّٖ وِجۡهَةٌ هُوَ مُوَلِّيهَاۖ فَٱسۡتَبِقُواْ ٱلۡخَيۡرَٰتِۚ أَيۡنَ مَا تَكُونُواْ يَأۡتِ بِكُمُ ٱللَّهُ جَمِيعًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ١٤٨
प्रत्येक के लिए एक दिशा है, जिसकी ओर वह मुख करने वाला है। अतः तुम भलाइयों में एक-दूसरे आगे बढ़ो। तुम जहाँ कही भी होगे, अल्लाह तुम्हें इकट्ठा करके लाएगा। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
तफ़सीर
हर क़ौम की कोई न कोई दिशा होती है, जिसकी ओर वह रुख करती है, चाहे वह दिशा इंद्रियगोचर हो या अगोचर (अभौतिक) हो। यही कारण है कि अलग-अलग समुदायों के अलग-अलग क़िबले और शरई प्रावधान हैं। इसलिए उनकी दिशाओं की विविधता से कोई नुक़सान नहीं, यदि वह अल्लाह के आदेश और उसकी शरीयत के अनुसार है। अतः - ऐ मोमिनो! - उन अच्छे कामों को करने में एक-दूसरे से आगे बढ़ो, जिन्हें करने का तुम्हें आदेश दिया गया है। तथा तुम जहाँ भी होगे, वहाँ से क़ियामत के दिन अल्लाह तुम्हें इकट्ठा करेगा; ताकि तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला दे। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है। अतः उसका तुम्हें इकट्ठा करना और बदला देना उसे विवश नहीं कर सकता।